Wednesday, December 31, 2008

मंगलमय हों भोर निशा सब

शुभ हो नये वर्ष में हर दिन, रातें बीतें हुई रुपहली
रहे चाँदनी रात, न छाये चन्दा पर कोई भी बदली
सपने ढलें एक प्रतिमा में, चाहों को उत्कर्ष मिल सके
सावन छेड़े नित मृदंग औ फ़ागुन पंथ बजाये ढपली

2 comments:

Shardula said...

नव-वर्ष का पहला छन्द, गुरु चरणों को समर्पित !
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तुम हिम आच्छादित शिखर सम
उच्च, प्रखर, प्रवीण, उज्जवलतम
हैं तुमको अर्पित अति सहर्ष
नव वर्ष के शत चरण-स्पर्श !

सतीश सक्सेना said...

नए वर्ष की शुभकामनायें राकेश भाई !