Tuesday, March 18, 2008

आज सौंवी पोस्ट है यह

आज सौंवी पोस्ट है यह

पर नया कुछ भी नहीं जो ये लगे मुझको हुआ है
या किसी नव भाव ने आ छंद गीतों का छुआ है
न बंधा सपना नया कोई सपन की डोर से ही
न किरन कोई नई आई निकल कर भोर से ही
और न बोली नदी ही ताल से आ साथ में बह
आज सौंवी पोस्ट है यह

शब्द वोही, है कलम वह, और वो ही भाव मेरे
ज्योति के पल भी वही,हैं बस वही छाये अंधेरे
न कोई परिचय बदल पाया, न बदला है अपरिचय
और वो ही संशयों की धुन्ध में लिपटा हुआ भय
साथ केवल पल जिन्हें अपना कहूँ हैं चार या छह
आज सौंवी पोस्ट है यह

क्या करूँ मैं, सोचता हूँ नाम को अपने बदल लूँ
रंग कलियों में भरूँ या पत्थरों के रुख मसल दूँ
या न कुछ भी मैं करूँ, हो मौन फिर से बैठ जाऊँ
या कहें जो आप अपना गीत अगला गुनगुनाऊँ
आज शायद लेखनी का जो पला भ्रम जायेगा ढह
आज सौंवी पोस्ट है यह

14 comments:

उन्मुक्त said...

बधाई। ईश्वर करे आप हज़ारवीं चिट्ठी का एलान करें

अनूप भार्गव said...

राकेश जी !
आप को इस शानदार शतक के लिये बहुत बहुत बधाई । आप की हर एक रचना को संजो कर रख लेने की इच्छा होती है ।

Udan Tashtari said...

सर्वप्रथम आपकी इस सौ वीं पोस्ट के लिये आपको हार्दिक बधाई.
पूरा चिट्ठासमुदाय आपके गीतों का दीवाना है. आशा है आप ऐसे ही शतक पर शतक लगाते रहेंगे और हम सभी को अपने गीतों की मिठास का और अधिक रसास्वादन कराते रहेंगे.

अनेकों शुभकामनायें.

Rama said...

राकेश जी,

डा. रमा द्विवेदी said....


आपके इस शानदार शतक के लिए बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं.... आपका हर गीत अनुपम है....हिन्दी साहित्य की धरोहर है....आपकी सृजनशीलता को सादर नमन....

sunita (shanoo) said...

सबसे पहले आपको सौंवी पोस्ट पर ढेरों बधाईयाँ...

आपकी सौंवी पोस्ट कितनी है मनभावन
जिसमें सजोंये आपने हर शब्द पावन
आप लिखे गीत हम सदियों तक गाते रहें
हर होली के अवसर पर गीत नया लाते रहें
सुनीता शानू

कंचन सिंह चौहान said...

नित्य गाएं गीत, सिंचित हम हों अविरल गान सुनकर,
मुग्ध होते ही रहें हम, आपकी ये तान सुन कर,
ये शती, सहस्त्रि होवे, और कोटिक तक चले।
मान अपना भी बढ़े, आपके आशिष तले।
और बोलूँ क्या भला, अब दिया इतना तो कह।

mahendra mishra said...

शानदार शतक पूरा करने पर मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये जल्द दोहरी सेचुरी पूरी करे .

Anonymous said...

सौ चिट्ठे पूरे करने की बधाई !

राकेश जी ! बदलाव कैसे नहीं है ? एक शतक पूरा कर दूसरे शतक की ओर बढना क्या बदलाव नहीं ? अपने अनगिनत भावों को हम तक पहुँचाना और अनगिनत की प्रतीक्षा हमें देना भी तो बदलाव ही है।

शतकों की संख्या बढती रहे…

शुभकामनाओं सहित
अन्नपूर्णा

Sanjeet Tripathi said...

बधाई और शुभकामनाएं

mamta said...

राकेश जी सौंवी पोस्ट के लिए आपको बधाई और शुभकामनाएं।

परमजीत बाली said...

राकेश जी,
सोंवी पोस्ट की बहुत-बहुत बधाई।सदा इसी तरह लिखते रहे।आप की रचनाओं को पढ़ कर बहुत आनंद आता है।

नीरज गोस्वामी said...

९९ वीं १०० वीं...ये सब मील के पत्थर हैं राकेश जी मंजिल अभी बहुत दूर है...लिखते रहिये और काव्य रसिकों को यूँ ही काव्य रस से भिगोते रहिये...शुभ कामनाओं सहित
नीरज

अभिनव said...

सौ पोस्टें हो गयीं एक से बढ़ कर एक,
गीत सुनहरे पढ़ लिए लोग बन गए नेक,
लोग बन गए नेक, भला अब काम करेंगे,
अच्छे गीत पढने सुनने में नही डरेंगे,
गीतों के हे राजकुंवर ये भाव है पावन,
सुर लय ताल सधी कविता से गूंजे जीवन.

Devi Nangrani said...

Rakesh
Tum jiyo harao saal aur likho dus hazaar rachnayein ji dil se dil tak setu bana paye. kavya ka surma chashm mein saptrangon se surmayi rang bhare hue hai. haan agar ye sach hai to

क्या करूँ मैं, सोचता हूँ नाम को अपने बदल लूँ
रंग कलियों में भरूँ या पत्थरों के रुख मसल दूँ

to tum turant apna Iraada badal do. Aisa sochna bhi gunah hai, aur ye tum bhi jante ho.
Aisi rawani khuda kare harek ki kalam mein aa jaye

shubhkamnaon ke saath
Devi