Monday, July 14, 2008

“बरखा-बहार”....


सूचना

महावीर‘ ब्लॉग पर मुशायरा (कवि-सम्मेलन)

“बरखा-बहार”
वरिष्ठ लेखक, समीक्षक, ग़ज़लकारश्री प्राण शर्मा जीकी प्रेरणा से जुलाई १५, २००८ एवं जुलाई २२,२००८ को ‘इसब्लॉगपर मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है।इस ब्लाग पर मुशायरे में शिरकत के लिए कवियों की बड़ी तादाद होने की वजह से मुशायरे कोदो भागोंमें दिया जा रहा है।पहला भाग १५ जुलाईऔरदूसरा भाग २२ जुलाई २००८को दिया जायेगा।

देश-वदेशसे शायरों और कवियों में प्राण शर्मा, लावण्या शाह, तेजेन्द्र शर्मा, देवमणि पांडेय, राकेश खण्डेलवाल, सुरेश चन्द्र “शौक़”,कवि कुलवंत सिंह, समीर लाल “समीर”,नीरज गोस्वामी, चाँद शुक्ला “हदियाबादी”,देवी नागरानी, रंजना भाटिया, डॉ. मंजुलता, कंचन चौहान,डॉ. महक, रज़िया अकबरमिर्ज़ा, हेमज्योत्सना “दीप”, नीरज त्रिपाठी आदि पधार रहे हैं।

आप से निवेदन है कि उनकी रचनाओं का रसास्वादन करते हुए ज़ोरदार तालियों (टिप्पणियों) से मुशायरे की शान बढ़ाएं।
महावीर शर्मा प्राण शर्मा
पत्र-व्यवहार इस ईमेल पर कीजिए :mahavirpsharma@yahoo.co.uk‘
महावीर‘ - http://mahavir.wordpress.com
और अब एक रचना इसी सन्दर्भ में
फिर आई ॠतु बरखा की


फिर आई ॠतु बरखा की

खपरैलों से टपके पानी ज्यों विरहिन की आँखें
छत की झिरियों से रह रह कर काली बदली झांके
दीवारों पर आकर बिजली का चाबुक लहराता
खिड़की के पल्ले खड़काकर पवन झकोरा गाता
फिर आई ॠतु बरखा की

सारा गांव सना कीचड़ में, घर आंगन पगडंडी
हफ़्ते भर से सूख न पाई लालाजी की वंडी
गीली हुईं लकड़ियां सारी, हुआ धुंआसा चूल्हा
सूरज दिखा नहीं परसों से, शायद रस्ता भूला
फिर आई ॠतु बरखा की

सिगड़ी पर भुनते हैं भुट्टे, तलने लगी पकोड़ी
लिये खोमचे दाल बड़े और खस्ता गरम कचौड़ी
हलवाई की तईयों में अंगड़ाई लेते घेवर
आये द्वारे मेघदूत, पी के सन्देसे लेकर
फिर आई ॠतु बरखा की

घर से बाहर निकले आकर छतरी और बरसाती
कागज़ की किश्ती तैराती बाल टोलियां गाती
छत की बंद मोरियां करके पानी का छपकाना
और भीगने पर दादी नानी की झिड़की खाना
फिर आई ॠतु बरखा की.

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर-आपने तो मुशायरे के पहले ही सुना डाली. :)

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह !!बरखा बहार आई ...बहुत सुंदर

नीरज गोस्वामी said...

राकेश जी
सूचना के साथ साथ कविता का रस स्वादन भी आपने करा दिया...ऐसा अनोख निमंत्रण और कहाँ मिलेगा.?
नीरज